Shri Garuda Kavacham in Sanskrit (गरुडकवचम् )

Shri Garuda Kavacham in Sanskrit (गरुडकवचम् )

हिंदू मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पक्षियों के राजा और भगवान विष्णु के वाहन हैं। गरुड़ कश्यप ऋषि और उनकी दूसरी पत्नी विनता की सन्तान हैं। भगवान गरूड़ को विनायक, गरुत्मत्, तार्क्ष्य, वैनतेय, नागान्तक, विष्णुरथ, खगेश्वर, सुपर्ण और पन्नगाशन नाम से भी जाना जाता है।  गरुडकवचम् का नियमित पाठ आपको भयमुक्त व् शक्तिशाली बनाएगा।  गरुडकवचम् का नियमित पठन आपके जीवन से बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकने में सक्षम है 

Garudaअथ गरुडकवचम् ।

हरिः ॐ ।
अस्य श्रीगरुडकवचस्तोत्रमन्त्रस्य नारद भगवान् ऋषिः
वैनतेयो देवता अनुष्टुप्छन्दः श्रीवैनतेयप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।

ॐ शिरो मे गरुडः पातु ललाटे विनितासुतः ।
नेत्रे तु सर्पहा पातु कर्णौ पातु सुराहतः ॥ १॥

नासिकां पातु सर्पारिः वदनं विष्णुवाहनः ।
सूर्येतालू च कण्ठे च भुजौ पातु महाबलः ॥ २॥

हस्तौ खगेश्वरः पातु कराग्रे तरुणाकृतिः ॥ ३॥

स्तनौ मे विहगः पातु हृदयं पातु सर्पहा ।
नाभिं पातु महातेजाः कटिं मे पातु वायुनः ॥ ४॥

ऊरू मे पातु उरगिरिः गुल्फौ विष्णुरथः सदा ।
पादौ मे तक्षकः सिद्धः पातु पादाङ्गुलींस्तथा ॥ ५॥

रोमकूपानि मे वीरो त्वचं पातु भयापहा ।
इत्येवं कवचं दिव्यं पापघ्नं सर्वकामदम् ॥ ६॥

यः पठेत्प्रातरुत्थाय विषदोषं न पश्यति ।
त्रिसन्ध्यं पठते नित्यं बन्धनात् मुच्यते नरः ।
द्वादशाहं पठेद्यस्तु मुच्यते सर्वकिल्विषैः ॥ ७॥

॥ इति श्रीनारदगरुडसंवादे गरुडकवचं सम्पूर्णम् ॥

 

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