Maha Mrityunjaya yantra

Jun 15 2016 Tags: Maha Mrityunjay, Mrityunjaya, remedy, yantra

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjaya Yantra) का जाप अकाल मृत्यु के योग को भी दूर कर देता है। भगवान शिव के इस मंत्र को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सदियों से इस मंत्र का वर्णन अलग-अलग वेदों और पुराणों में किया गया है। मंत्र के साथ कई लोग महामृत्युंजय यंत्र की पूजा भी करते हैं।

महामृत्युंजय यंत्र का उपयोग (How to Use Mahamrityunjaya Yantra)
मृत्युंजय का अर्थ होता है मृत्यु पर विजय। इस यंत्र की पूजा करते समय पूर्व की दिशा में मुख कर कुशा आसन धारण करना चाहिए। इस यंत्र की पूजा और आराधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना व प्रभाव (Effects of Mahamrityunjaya Yantra)
महामृत्युंजय यंत्र को शुद्धिपूर्वक व विशेष विधि द्वारा स्थापित किया जाता है। इस यंत्र को स्थापित करने से पूर्व किसी सुयोग्य ज्योतिष व पंडित से सलाह अवश्य लें। माना जाता है कि महामृत्युंजय मंत्र के साथ महामृत्युंजय यंत्र की पूजा करने वाले जातक का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। महामृत्युंजय यंत्र की पूजा करने से मृत्यु का भय खत्म हो जाता है, तथा गंभीर बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है।इस यन्त्र को पूजा कक्ष में स्थापित करके महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की सभी प्रकार की समस्याए समाप्त हो जाती है । और उसे मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है । यह मंत्र इस प्रकार है :-

|महा मृत्‍युंजय मंत्र ||

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

||महा मृत्‍युंजय मंत्र का अर्थ ||

समस्‍त संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले शिव की हम अराधना करते हैं। विश्‍व में सुरभि फैलाने वाले भगवान शिव मृत्‍यु न कि मोक्ष से हमें मुक्ति दिलाएं।
महामृत्युंजय मंत्र के वर्णों का अर्थ
महामृत्युंघजय मंत्र के वर्ण पद वाक्यक चरण आधी ऋचा और सम्पुतर्ण ऋचा-इन छ: अंगों के अलग-अलग अभिप्राय हैं।

महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ
त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वाला
यजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय
सुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधित
पुष्टि = एक सुपोषित स्थिति,फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णता
वर्धनम = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है, स्वास्थ्य, धन, सुख में वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है, और स्वास्थ्य प्रदान करता है,
उर्वारुकम= ककड़ी
इव= जैसे, इस तरह
बंधना= तना
मृत्युर = मृत्यु से
मुक्षिया = हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें
मा= न
अमृतात= अमरता, मोक्ष

ऋषि-मुनियों ने महा मृत्युंजय मंत्र को वेद का ह्रदय कहा है. चिंतन और ध्यान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनेक मंत्रों में इस मंत्र का सर्वोच्च स्थान है. ओम त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठर के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं । साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है । महामृत्युंरजय का पाठ करने वाला प्राणी हर दृष्टि से सुखी एवम समृध्दिशाली होता है । भगवान शिव की अमृतमयी कृपा उस निरन्तंर बरसती रहती है।

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